साहित्यकार
हरिशंकर परसाई
हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय हरिशंकर परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गाँव में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार थे, जिन्होंने व्यंग्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उनका बचपन संघर्षों से भरा था। उच्च शिक्षा के लिए...
सरहपा
सिद्ध सरहपा, जिन्हें राहुलभद्र और सरोज-वज्र के नाम से भी जाना जाता है, तांत्रिक बौद्ध परंपरा के आदिम सिद्ध माने जाते हैं। वज्रयानी चौरासी सिद्धों में सरहपा का स्थान सबसे प्रमुख और आदिक सिद्ध के रूप में माना जाता है। उनके जीवन और कार्यों ने भारतीय तांत्रिक साधना परंपरा और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदा...
महादेवी वर्मा
यदि हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में किसी ऐसी साहित्यकार का नाम लिया जाए जिसने कविता, गद्य, शिक्षा, स्त्री-अधिकार, समाज सुधार और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ नई दिशा दी, तो महादेवी वर्मा का स्थान अत्यंत विशिष्ट दिखाई देता है। उन्हें प्रायः "आधुनिक मीरा" कहा जाता है, किन्तु उनका व्यक्तित्व इस एक उपाधि ...
भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेन्दु हरिश्चंद्र (9 सितंबर 1850 - 6 जनवरी 1885) हिंदी साहित्य के पितामह और आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक माने जाते हैं। अपने अल्प जीवन में उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, समाज-सुधार और संस्कृति के क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान दिया, जिसके कारण उनका नाम आज भी हिंदी साहित्य में स्वर्णाक्षरों में अंकि...
फणीश्वरनाथ रेणु का जीवन परिचय
आधुनिक हिंदी साहित्य में यदि मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय ग्रामीण भारत की सामाजिक यथार्थवादी परंपरा की मजबूत नींव रखता है, तो फणीश्वरनाथ रेणु ने उसमें लोकजीवन की गंध, लोकभाषा की आत्मीयता और आंचलिकता के जीवंत रंग भर दिए। यही कारण है कि उन्हें हिंदी साहित्य का महान आँचलिक कथाकार, स्वातंत्र्योत्तर हिंद...
प्रेमचंद
प्रेमचंद, जिन्हें मूल रूप से धनपत राय श्रीवास्तव के नाम से जाना जाता था, का जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के लमही गाँव में हुआ था। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे प्रेमचंद ने हिंदी और उर्दू साहित्य को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया और उन्हें हिंदी साहित्य के "उपन्यास सम्राट" के रूप में जाना जाता है। ...
घनानंद
घनानंद (1673-1760) रीतिकाल के एक प्रमुख कवि थे, जिन्हें रीतिमुक्त धारा का प्रतिनिधि कवि माना जाता है। उनका जन्म दिल्ली के आसपास हुआ था, लेकिन उनके जन्मस्थान और परिवार के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी नहीं है। घनानंद साहित्य और संगीत दोनों में निपुण थे, और मुगल सम्राट मुहम्मद शाह 'रंगीले' के दरबार में...
कबीरदास
कबीरदास का जीवन परिचय कबीरदास 15वीं शताब्दी के एक महान संत, कवि और समाज सुधारक थे, जिनका जन्म 1398 ई. में वाराणसी के लहरतारा तालाब के पास हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि वे एक कमल के फूल पर प्रकट हुए थे और उनका लालन-पालन नीरू और नीमा नामक जुलाहा दंपति ने किया था। कबीरदास जी ने औपचारिक शिक्षा नहीं प्राप्...
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आलोचक, इतिहासकार और विचारक थे, जिनका जन्म 1 अक्टूबर 1884 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगौना गाँव में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा मिर्जापुर में हुई और बाद में उन्होंने प्रयाग की कायस्थ पाठशाला से इंटर की पढ़ाई पूरी की। स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंन...