Search
Close this search box.

आदिकाल की प्रमुख परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए?

आदिकाल की प्रमुख परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए | Hindi Stack
किसी भी काल के साहित्य को समझने के लिये उस काल की प्रवृतियों पर दृष्टिपात करना परम् आवश्यक है। इसका कारण यह है कि साहित्य-सर्जना में मनुष्य के परिवेश के बहुत महत्व है। उस परिवेश के आकलन करके ही किसी भाषा के इतिहास को जाना-समझा जा सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आदिकाल की परिस्थितियों का विवेचन एंव विश्लेषण निम्नलिखित शीर्षकों के अंर्तगत किया जा सकता है –

राजनीतिक परिस्थिति :

आदिकाल की अवधि को 769 ई० से 1418 ई० तक माना गया है। वस्तुतः यह जबर्दस्त उथल पुथल का समय है। क्योंकि यही वह समय है जब वर्द्धन-साम्राज्य का पतन हुआ। इसी समय में उत्तरी भारत पर यवनों के आक्रमण भी होने लगे थे। जिससे ‘हर्ष वर्द्धन’ के साम्राज्य का भवन चरमरा गया था। इसके पतन के पश्चात आए राजपूत राजा भी धीरे-धीरे अपनी शक्ति समेटकर मुगल साम्राज्य की क्रोड़ में समा गए। हिंदूसत्ता के क्षय के साथ-साथ मुगल साम्राज्य का सूर्य प्रखर होने लगा। जन-जीवन उनके अत्याचारों का लक्ष्य बना हुआ था। राजपूत राजाओं में भी अंतर्कलह होने से ग्रहयुद्ध प्रारंभ हो गए। प्रजा इन राजाओं के अत्याचारों से दुःखी होकर त्राहि-त्राहि करने लगी। हिंदी-भाषी क्षेत्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ा तथा इस काल का साहित्य जनता के आक्रोश एंव ओज का प्रतिफल बनकर सामने आया। आदिकाल का साहित्य निरन्तर युद्धों में जलते हुए तत्कालीन समाज का दर्पण है।

हिंदी-साहित्य के आदिकाल में ‘रासो-ग्रंथों’ की प्रचुरता है। इस काल के अधिकांश कवि राज्याश्रित थे। एक जागरूक सामाजिक होने , एंव अपने आश्रयदाता को प्रसन्न करने की प्रवृत्ति के कारण ही इस काल की अधिकांश गाथायें वीर रस को लेकर अभिव्यक्त करती हैं। यहां तक कि यह राज्याश्रयी कवि अपने मित्र एंव आश्रयदाता राजा के साथ युद्ध के मैदानों में जाकर शत्रु से वीरतापूर्ण मुकाबला भी करते थे। इन सभी कारणों से आदिकाल के साहित्य युद्धों का कहीं अतिशयोक्तिपूर्ण तथा कहीं स्वाभाविक वर्णन दिखाई पड़ता है।

धार्मिक परिस्थितयाँ:

आदिकाल में देश का धार्मिक वातावरण भी अशान्त था। ईसा की सप्तम शताब्दी में धार्मिक परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ। इस काल में बौद्ध धर्म का पतन आरम्भ हो गया। इससे पहले वैदिक यज्ञ, मूर्तीपूजा एंव बौद्ध-उपासना-पद्धतियाँ एकसाथ प्रचलित थीं, किन्तु अब आलम्बार एंव नायम्बार संत एक नया आंदोलन लेकर आये, जिसके फलस्वरूप बौद्ध धर्म की शक्ति घटने लगी। बारहवीं शताब्दी तक वैष्णव मत का आंदोलन भी जोर पकड़ने लगा। जनता के समक्ष नये-नये पन्थ एंव विचाधाराएँ प्रस्तुत कर उन्हें दिग्भ्रमित किया जाता रहा। उत्तर-भारत के पश्चिमी तथा पूर्वी प्रान्त सिद्धों एंव नाथों की वाणियों के प्रभाव में रहे। वस्तुस्थिति यह है कि धार्मिक दृष्टि से यह संक्रांति काल कहा जा सकता है। विविध सम्प्रदायों के पारस्परिक विरोध में अशिक्षित जेंट्स भी पिसकर अपना सम्बल खोती जा रही थी। इस काल की धार्मिक परिस्थितियों के अनुरूप ही साहित्य में भी खण्डन-मण्डन, हठयोग, वीरता एंव श्रृंगार का प्राधान्य है।

सामाजिक परिस्थितियाँ:

आदिकाल की राजनीतिक एंव धार्मिक परिस्थितियों का सीधा प्रभाव तत्कालीन समाज पर पड़ा । अशिक्षित जनता शासन एंव धर्म दोनों ओर से निराश्रित होकर अपना विश्वास खोने लगी । धार्मिक दृष्टि से भ्रामक विचारधाराओं के पाटों में पिसता हुआ समाज असहाय हो उठा । उच्च एंव निम्न वर्ग में समाज का विभाजन हो गया । जनता युद्धों एंव महामारियों की शिकार होकर त्राहि – त्राहि कर उठी । ऐसी विषम परिस्थितियों में नारी भी केवल भोग्या बनकर रह गई । किसी भी सुंदर नारी का अपहरण राजाओं का स्वभाव बन गया था-

“जिहि की बिटिया सुंदर देखी तिहि पर जाई धरे हथियार”

इस काल में सती प्रथा समाज के लिये अभिशाप बन चुकी थी। योगियों तथा सिद्धों से गृहस्थ आतंकित थे। निम्न वर्ग के लिये जीवन-यापन के साधन जुटाना भी कठिन से कठिनतर होता गया । ऐसी विपरीत परिस्थितियों में कवियों ने भी एक नवीन ओजपूर्ण वातावरण की सृष्टिहेतु वीर रसपूर्ण काव्यों की रचना की।

(4) सांस्कृतिक परिस्थितियाँ:

आदिकाल को भारतीय संस्कृति एंव मुस्लिम संस्कृति के संक्रमण एंव ह्रास-विकास का काल कहना उपयुक्त होगा। इस काल में विभिन्न जातियों, मतों एंव आचारों-विचारों में समन्वय की प्रक्रिया उत्कर्ष को प्राप्त थी। हर्षवर्द्धन के साम्राज्य ने हिन्दू धर्म एंव संस्कृति को व्यापक आधार दिया। इस काल की भारतीय संस्कृति, मुस्लिम संस्कृति से बहुत गहराई तक प्रभावित है। स्थापत्यकला चर्मोत्कर्ष पर थी। भुवनेश्वर, खजुराहो, पुरी, सोमनाथपुर, तंजौर आदि स्थलों पर भव्य मंदिरों का निर्माण इसी काल में हुआ। इसी सांस्कृतिक भव्यता से मुस्लिम शासकों को द्वेष हुआ तथा वह इस वैभवशाली देश से निरन्तर आक्रमण कर इसे ध्वस्त करने व लूटने का प्रयास करने लगे। आदिकाल में उत्सव , मेले, मनोरंजन, आदि सभी में मुस्लिम संस्कृति का प्रभाव झलकने लगा। चित्रकला के क्षेत्र में भी मुस्लिम प्रभाव पाया जाता है। इस प्रकार आदिकाल की सांस्कृतिक परिस्थितयाँ इस्लाम के रंग से अछूती नहीं रह सकीं तथा कलात्मक चेतना का मुक्त स्वरूप लुप्त हो गया।

(5) साहित्यिक परिस्थितयाँ :

इस काल में साहित्य की तीन प्रमुख धाराएँ गंगा, यमुना व सरस्वती की भाँति प्रवाहित हुईं। इनमें एक धारा संस्कृत साहित्य की थी, दूसरी प्राकृत व अपभ्रंश की तथा तीसरी धारा हिंदी भाषा में लिखे जाने वाले साहित्य की थी। संस्कृत काव्यशास्त्र की आचार्य आनंदवर्धन, मम्मट, क्षेमेन्द्र, कुंतक, भोज, राजशेखर, विश्वनाथ, भवभूति आदि ने चर्मोत्कर्ष प्रदान किया। इसी काल में शंकर, कुमारिलभट्ट, भास्कर एंव रामानुज आदि आचार्यों ने आविर्भूत होकर अपने-अपने दार्शनिक सिद्धान्तों की स्थापना की। संस्कृत , प्राकृत एंव अपभ्रंश के श्रेष्ठ साहित्य की सर्जना भी इस युग मे हुई । जैन आचार्यों ने संस्कृत – पुराणों को एक नवीन रूप में प्रस्तुत किया तथा प्राकृत, अपभ्रंश एंव पुरानी हिंदी में साहित्य-सर्जना की। “संदेश-रासक” जैसा अमर काव्य-ग्रंथ रचकर अब्दुर्रहमान ने विपुल यश अर्जित किया। इस काल की परिस्थितियों ने संस्कृत एंव प्राकृत की अपेक्षा हिंदी भाषा को अधिक प्रभावित किया। हिंदी साहित्य में तत्कालीन परिस्थितियों का मुखरित रूप है।

निष्कर्ष:

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि किसी काल के साहित्य पर उस काल की विभिन्न परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। आदिकाल की भाषा ने भी जन-जीवन से प्रेरित हो अपना स्वरूप ग्रहण किया। हिंदी की अनेक परम्पराओं का मूल – रूप आदिकाल में देखा जा सकता है।


4 users like this article.

Avatar of nitesh sharma
Avatar of pirachi raikwar

Leave a Reply

Related Articles

हिंदी साहित्य का काल-विभाजन एवं विभिन्न कालों का उपयुक्त नामकरण | Hindi Stack

हिंदी साहित्य का काल-विभाजन और...

हिंदी में साहित्य का इतिहास लेखन की परम्परा | Hindi Stack

हिंदी में साहित्य का इतिहास ले...

हिंदी नाटक के उद्भव एंव विकास को स्पष्ट कीजिए ? | Hindi stack

हिंदी नाटक के उद्भव एंव विकास ...

हिंदी का प्रथम कवि | Hindistack

हिंदी का प्रथम कवि

सूफी काव्य की महत्वपूर्ण विशेषताएँ | Hindi Sahitya

सूफी काव्य की विशेषताएँ

राही कहानी | सुभद्रा कुमारी चौहान | Rahi kahani by Subhadra Kumari Chauhan | Hindi stack

सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ...

No more posts to show

Tags

हिंदी साहित्य
Hindi sahitya
अनुवाद
कहानी
Anuwad
Translation
Anuvad
Kahani
Aadikal
उपन्यास
आदिकाल
hindi kahani
Aadhunik kaal
भक्तिकाल
आधुनिक काल
रीतिकाल
फणीश्वरनाथ रेणु
Bhisham Sahni
आरोह
Vitaan

Latest Posts

1
रीतिकाल की परिस्थितियों का विवेचन
2
महादेवी वर्मा के काव्य में वेदना और करूणा की अभिव्यक्ति
3
आदिकाल की प्रमुख परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए?
4
शेखर एक जीवनी में विद्रोह का स्वर
5
हिंदी साहित्य का काल-विभाजन और नामकरण
6
राम की शक्ति पूजा की मूल संवेदना

Popular Posts

रीतिकाल की प्रमुख परिस्थितियों का विवेचन कीजिए। | Hindi Stack

रीतिकाल की परिस्थितियों का विव...

महादेवी वर्मा के काव्य में वेदना एंव करूणा की अभिव्यक्ति पर प्रकाश डालिए ? | Hindi Stack

महादेवी वर्मा के काव्य में वेद...

आदिकाल की प्रमुख परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए | Hindi Stack

आदिकाल की प्रमुख परिस्थितियों ...

शेखर एक जीवनी में विद्रोह का स्वर | Hindi Stack

शेखर एक जीवनी में विद्रोह का स...

हिंदी साहित्य का काल-विभाजन एवं विभिन्न कालों का उपयुक्त नामकरण | Hindi Stack

हिंदी साहित्य का काल-विभाजन और...

राम की शक्ति पूजा की मूल संवेदना | Hindi Stack

राम की शक्ति पूजा की मूल संवेद...